देहरादून | खबर पहरेदार
उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत और विभिन्न कारणों से प्रभावित अस्थायी शिक्षकों ने सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत से मुलाकात कर अपने लंबित मुद्दों पर जल्द निर्णय लेने की मांग की। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से समायोजन, सेवा सुरक्षा और वेतन वृद्धि जैसे मुद्दे लंबित हैं, जिससे हजारों शिक्षकों के सामने भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
देहरादून स्थित यमुना कॉलोनी में मंत्री आवास पर हुई इस मुलाकात में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि पिछले करीब दो वर्षों के दौरान कई दौर की वार्ता, ज्ञापन और आश्वासन के बावजूद अब तक कोई ठोस नीतिगत निर्णय सामने नहीं आया है। उनका कहना था कि विभाग में कार्यरत कई अस्थायी शिक्षक आज भी सीमित मानदेय पर सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति नहीं बन पाई है।
प्रतिनिधियों ने मंत्री के समक्ष मांग रखी कि सभी कार्यरत एवं प्रभावित अस्थायी शिक्षकों के लिए समायोजन की स्पष्ट व्यवस्था की जाए, सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और मानदेय में भी यथोचित सुधार किया जाए। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता है।
मुलाकात के दौरान मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध रिक्त पदों का विवरण तैयार कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। प्रतिनिधिमंडल ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए उम्मीद जताई कि सरकार जल्द इस मामले में निर्णय लेगी।
हालांकि शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आने वाले समय में समायोजन, वेतन वृद्धि और सेवा सुरक्षा के संबंध में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो सभी प्रभावित और कार्यरत अस्थायी शिक्षक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशभर के अस्थायी शिक्षकों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई केवल कुछ लोगों की नहीं, बल्कि पूरे अस्थायी शिक्षक वर्ग के सम्मान, सुरक्षा और भविष्य से जुड़ी है।
प्रतिनिधिमंडल में डॉ. रोहित, डॉ. मोहित, डॉ. मनोज, डॉ. शैलेश, डॉ. सरन, डॉ. प्रवेश, डॉ. चिंतामणि, डॉ. राकेश, डॉ. ममता, डॉ. जयहरी, डॉ. रणजीत, डॉ. राकेश, डॉ. ब्रह्मराज, डॉ. बबलू, डॉ. बिपिन, डॉ. प्रियंका, डॉ. धर्मेंद्र, डॉ. ममता सहित अन्य अस्थायी शिक्षक शामिल रहे।

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